हिंदी साहित्य से डिजिटल मीडिया तक, विद्यार्थियों को बताए करियर के अवसर
हिंदी भाषा केवल साहित्य और अध्यापन तक सीमित नहीं, पत्रकारिता, अनुवाद, कंटेंट राइटिंग और जनसंचार में भी रोजगार की संभावनाएं
छगन कुशवाहा
पिपरिया। हिंदी दिवस के अवसर पर शहीद भगत सिंह शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में मंगलवार को भारतीय ज्ञान परंपरा प्रकोष्ठ एवं स्वामी विवेकानंद कैरियर मार्गदर्शन प्रकोष्ठ के संयुक्त तत्वावधान में विभिन्न गतिविधियों का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत मां सरस्वती के पूजन एवं वंदना से हुई। महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. राजीव माहेश्वरी ने विद्यार्थियों को हिंदी भाषा के महत्व, भारतीय संस्कृति एवं ज्ञान परंपरा में इसकी भूमिका तथा वैश्विक स्तर पर हिंदी के बढ़ते प्रभाव की जानकारी दी।
भाषण प्रतियोगिता में खुशी रजक प्रथम
भारतीय ज्ञान परंपरा के तहत ‘भारतीय ज्ञान परंपरा में हिंदी भाषा एवं साहित्य की भूमिका’ विषय पर भाषण प्रतियोगिता आयोजित हुई। इसमें सात विद्यार्थियों ने सहभागिता की। बीए तृतीय वर्ष की खुशी रजक ने प्रथम, एमए द्वितीय सेमेस्टर के प्रियंक साहू ने द्वितीय और बीए तृतीय वर्ष के दुर्गेश सूर्यवंशी ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। प्रतियोगिता का आयोजन डॉ. कविता नामदेव, डॉ. संगीता साहू एवं डॉ. अनिता साहू ने किया।
पत्रकारिता से प्रतियोगी परीक्षाओं तक बताए विकल्प
कार्यक्रम के दूसरे चरण में स्वामी विवेकानंद कैरियर मार्गदर्शन प्रकोष्ठ की ओर से ‘हिंदी भाषा में करियर के विकल्प’ विषय पर विद्यार्थियों को मार्गदर्शन दिया गया। प्रकोष्ठ प्रभारी डॉ. अनिता सेन ने बताया कि हिंदी को केवल साहित्य और अध्यापन तक सीमित समझने की जरूरत नहीं है। पत्रकारिता, अनुवाद, कंटेंट राइटिंग, डिजिटल मीडिया, विज्ञापन, जनसंचार, प्रकाशन और प्रतियोगी परीक्षाओं सहित कई क्षेत्रों में हिंदी के माध्यम से करियर बनाया जा सकता है। विद्यार्थियों को विषय की उपयोगिता समझाने के लिए हिंदी भाषा में करियर विकल्पों पर आधारित लघु फिल्म भी दिखाई गई।
कार्यक्रम में डॉ. एसके मेहरा, प्रो. एसके बघेल, डॉ. आरजी पटेल सहित महाविद्यालय का स्टाफ और बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे। संचालन भारतीय ज्ञान परंपरा प्रकोष्ठ प्रभारी महेंद्र चौकसे ने किया।
संदेश: कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों में हिंदी भाषा के प्रति गौरव की भावना के साथ इसे रोजगार और करियर की प्रभावी भाषा के रूप में देखने की नई सोच विकसित हुई।
