बनखेड़ी के राजा के दरबार में उमड़ रही आस्था, सनातन परंपरा के रंग में रंगा गणेश उत्सव
भाग्यश्री कंप्यूटर के सामने मार्केट में सजा गणपति दरबार, दर्शन के लिए पहुंच रहे श्रद्धालु
विधि-विधान से पूजा-अर्चना के साथ गूंज रहे गणपति बप्पा मोरया के जयकारे
बनखेड़ी। गणेश उत्सव केवल उत्सव नहीं, बल्कि सनातन धर्म की उस परंपरा का प्रतीक है, जिसमें प्रथम पूज्य भगवान श्रीगणेश की आराधना से शुभ कार्यों का शुभारंभ किया जाता है। इसी आस्था और धार्मिक परंपरा को आगे बढ़ाते हुए भाग्यश्री कंप्यूटर के सामने मार्केट में बनखेड़ी के राजा गणेश उत्सव समिति द्वारा गणपति की स्थापना की गई है।
गणेशजी की प्रतिमा के दर्शन के लिए प्रतिदिन श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। समिति द्वारा भगवान श्रीगणेश की पूजा-अर्चना सनातन परंपरा और धार्मिक विधि-विधान के साथ की जा रही है। शाम होते ही गणपति दरबार में श्रद्धालुओं की आवाजाही बढ़ जाती है और ‘गणपति बप्पा मोरया’ के जयकारों से वातावरण भक्तिमय हो उठता है।
प्रथम पूज्य की आराधना से मिलता है शुभता का संदेश
सनातन परंपरा में भगवान श्रीगणेश को विघ्नहर्ता और मंगलकर्ता माना गया है। किसी भी शुभ कार्य से पहले गणेश पूजन की परंपरा इसी धार्मिक मान्यता से जुड़ी है। गणेश उत्सव के माध्यम से नई पीढ़ी को भी भारतीय संस्कृति, धार्मिक परंपराओं और सामूहिक उत्सव की भावना से जोड़ने का संदेश दिया जा रहा है।
भक्ति के साथ संस्कारों का उत्सव
बनखेड़ी के राजा गणेश उत्सव समिति का आयोजन श्रद्धा, भक्ति और सामाजिक सहभागिता का केंद्र बना हुआ है। गणपति पंडाल में पहुंचने वाले श्रद्धालु भगवान गणेश के दर्शन कर सुख-समृद्धि और परिवार की मंगलकामना करते हैं। उत्सव के दौरान धार्मिक वातावरण के साथ सनातन संस्कृति के संस्कारों को जीवंत रखने का प्रयास भी दिखाई दे रहा है।
