समर्थन मूल्य पर धान बेची, 8 महीने बाद भी भुगतान नहीं; किसान बोले- राशि मांगने पर धमकी, 50% छोड़ने का दबाव
किरण स्व-सहायता समूह और वेयरहाउस एजेंसी पर भुगतान रोकने के आरोप, किसानों ने अधिकारियों की भूमिका पर भी उठाए सवाल
10 किसानों की 30 लाख के लगभग की राशि अटकी होने का दावा; एसडीएम-कलेक्टर से लेकर खाद्य विभाग तक शिकायत, समाधान नहीं होने पर आत्मदाह की चेतावनी
छगन कुशवाहापिपरिया। समर्थन मूल्य पर धान बेचने के बाद महीनों तक भुगतान नहीं मिलने से क्षेत्र के किसानों का आक्रोश बढ़ता जा रहा है। मरकाढ़ाना, कुडारी, खिडिया, डूंडा और सेमरीरंधीर क्षेत्र के करीब 10 किसानों ने किरण स्व-सहायता समूह पुनौर एवं मां शारदा वेयरहाउस सेमरीरंधीर तुलाई केंद्र पर धान बेचने के बावजूद राशि का भुगतान नहीं होने का आरोप लगाया है। किसानों का कहना है कि उन्होंने जनवरी 2026 में अलग-अलग तारीखों पर धान समर्थन मूल्य पर बेची थी, लेकिन 15 सितंबर 2026 तक भुगतान नहीं हुआ।
किसानों ने थाना मंगलवारा सहित प्रशासनिक अधिकारियों को दिए आवेदन में आरोप लगाया है कि भुगतान की मांग करने पर पहले उन्हें एक सप्ताह में राशि दिलाने का आश्वासन दिया जाता रहा। बाद में कथित तौर पर राशि देने से इनकार करते हुए धमकी दी गई। किसानों ने वेयरहाउस संचालक और किरण स्व-सहायता समूह के प्रबंधक पर उनकी उपज की राशि रोकने के आरोप लगाए हैं।
कलेक्टर कैंप में शिकायत के बाद भी नहीं मिला भुगतान
किसानों के अनुसार 4 सितंबर को मंडी प्रांगण पिपरिया में आयोजित कलेक्टर कैंप में भी उन्होंने अपनी समस्या रखी थी। शिकायत में किसानों ने बताया कि खाद्य निरीक्षक मनोज शुक्ला ने उन्हें जल्द भुगतान कराने का भरोसा दिया था। किसानों का आरोप है कि बाद में उनसे कथित तौर पर 50 प्रतिशत राशि छोड़कर समझौता करने के लिए कहा गया और ऐसा नहीं करने पर भुगतान नहीं मिलने की बात कही गई।
किसानों ने इस पूरे मामले में संबंधित एजेंसियों के साथ खाद्य विभाग के अधिकारी की भूमिका की भी जांच कराने की मांग की है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि शिकायत में उपलब्ध दस्तावेजों से नहीं होती है।
कई जगह शिकायत, फिर भी समाधान नहीं
किसानों का कहना है कि वे एसडीएम कार्यालय पिपरिया, कलेक्टर कार्यालय नर्मदापुरम, खाद्य विभाग, मुख्यमंत्री कार्यालय, कमिश्नर कार्यालय और ग्राम पंचायत स्तर तक शिकायत कर चुके हैं। किसानों के अनुसार हेल्पलाइन 181 पर भी शिकायतें दर्ज कराई गई हैं, लेकिन अभी तक भुगतान की समस्या का समाधान नहीं हुआ।
किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि उनकी बकाया धान राशि तत्काल दिलाई जाए और भुगतान में देरी व कथित अनियमितता की जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की जाए।
आत्मदाह की चेतावनी से प्रशासन पर बढ़ा दबाव
भुगतान नहीं होने से आर्थिक संकट का हवाला देते हुए किसानों ने एसडीओ राजस्व को दिए आवेदन में चेतावनी दी है कि यदि उनकी राशि का शीघ्र भुगतान नहीं हुआ तो वे आत्मदाह जैसे कदम उठाने के लिए मजबूर होंगे, जिसकी जिम्मेदारी संबंधित विभागीय अधिकारियों की होगी। मामले की गंभीरता को देखते हुए किसानों ने मुख्यमंत्री, केंद्रीय कृषि मंत्री और कलेक्टर को भी प्रतियां भेजने की बात कही है।
धान की बकाया राशि के भुगतान की मांग को लेकर अधिकारियों को शिकायत देते किसान।

