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विध्नहर्ता दरबार में सजा कथा का दरबार, भागवत कथा में प्रकृति संरक्षण का संदेश

 

विध्नहर्ता दरबार में सजा कथा का दरबार, भागवत कथा में प्रकृति संरक्षण का संदेश



पं. सौरभ व्यास ने कहा- ब्रह्मांड भगवान का स्वरूप, प्रकृति से छेड़छाड़ करना स्वयं के शरीर को पीड़ा देने जैसा


छगन कुशवाहा 

पिपरिया। सांडिया रोड स्थित किट्टम-किट्टू तिगड्डा पर श्री गणेश उत्सव समिति द्वारा आकर्षक रूप से सजाए गए पंडाल में शनिवार से संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा का शुभारंभ हुआ। भगवान श्री गणेश की प्रतिमा के समक्ष सजे कथा दरबार में श्रद्धालुओं ने गणपति दर्शन के साथ भागवत कथा का श्रवण किया। कथा का वाचन आचार्य पं. सौरभ व्यास कर रहे हैं। प्रतिदिन दोपहर 2 बजे से होने वाली कथा में धार्मिक प्रसंगों के साथ भजन-संगीत की प्रस्तुतियां भी श्रद्धालुओं को भक्ति में सराबोर कर रही हैं।


ब्रह्मांड को भगवान का स्वरूप बताया

कथा के दौरान पं. सौरभ व्यास ने ब्रह्मांड की संरचना को भगवान के स्वरूप से जोड़ते हुए प्रकृति संरक्षण का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि भगवान के मस्तक के केश वृक्षों के समान हैं। जिस तरह शरीर के लिए सांस जरूरी है, उसी तरह मानव जीवन के लिए वृक्ष और उनसे मिलने वाली ऑक्सीजन जरूरी है। इसलिए वृक्ष लगाना ही नहीं, उनकी रक्षा करना भी प्रत्येक व्यक्ति का दायित्व है।


पहाड़ हृदय, नदियां शरीर की नस-नाड़ियों के समान

उन्होंने बड़े-बड़े पहाड़ों को भगवान के हृदय और छोटी-बड़ी पवित्र नदियों को शरीर की नस-नाड़ियों के समान बताया। कहा कि जिस प्रकार शरीर की नस-नाड़ी में रुकावट होने पर पीड़ा और कष्ट बढ़ जाता है, उसी प्रकार नदियों के प्राकृतिक प्रवाह से छेड़छाड़ भी प्रकृति के लिए संकट पैदा करती है। नदियों से अवैध रूप से रेत निकालकर उन्हें छलनी किया जा रहा है। मनुष्य यदि अपने स्वार्थ के लिए प्रकृति से इसी तरह छेड़छाड़ करता रहा तो भविष्य में बड़ी प्राकृतिक आपदा का कारण बन सकता है।


नदियों में पूजन सामग्री और कचरा न डालने की अपील

पं. व्यास ने कहा कि आज लोग पवित्र नदियों में पूजन सामग्री, कचरा और कांच से सजी भगवान की तस्वीरें तक प्रवाहित कर रहे हैं। इससे जलीय जीव-जंतुओं को नुकसान पहुंचता है और जलस्रोतों का प्राकृतिक स्वरूप भी प्रभावित होता है। उन्होंने श्रद्धालुओं से नदियों को स्वच्छ रखने और प्रकृति के प्रति संवेदनशील रहने का आह्वान किया।


गणपति दर्शन के साथ भागवत श्रवण

गणेश उत्सव के लिए सजे भव्य पंडाल में भगवान गणपति की प्रतिमा के समक्ष कथा के लिए विशेष व्यवस्था की गई है। श्रद्धालु प्रतिदिन गणपति दर्शन के साथ श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण कर रहे हैं। धार्मिक आयोजन के साथ प्रकृति संरक्षण का संदेश भी श्रद्धालुओं को प्रेरित कर रहा है।





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