सपने में कन्या रूप में मां ने दिए दर्शन, 21 साल से पैरों में आस्था लेकर चल रहे सतीश
70 किलो वजन के साथ वैष्णो देवी से शुरू हुई पदयात्रा, अमरनाथ समेत कई धार्मिक धामों की कर चुके हैं पैदल यात्रा; अब नर्मदा जल लेकर महाकाल के अभिषेक का संकल्प
छगन कुशवाहा
पिपरिया। आस्था अगर सच्ची हो तो रास्ते की दूरी मायने नहीं रखती और पैरों की थकान भी संकल्प के आगे छोटी पड़ जाती है। इंदौर निवासी सतीश कुशवाहा पिछले 21 वर्षों से धार्मिक पदयात्राओं के जरिए इसी आस्था और विश्वास की मिसाल पेश कर रहे हैं। सतीश बताते हैं कि करीब 21 साल पहले उन्हें सपने में छोटी कन्या के रूप में मां के दर्शन हुए। इस आध्यात्मिक अनुभूति ने उनके मन में ऐसी प्रेरणा जगाई कि उन्होंने पैदल धार्मिक यात्राओं का संकल्प ले लिया।
सतीश की पहली पदयात्रा मां वैष्णो देवी धाम की रही। उन्होंने करीब 70 किलो वजन के साथ पैदल यात्रा शुरू की। इसके बाद आस्था का यह सिलसिला लगातार आगे बढ़ता गया। उन्होंने बाबा अमरनाथ सहित देश के कई राज्यों और विभिन्न धार्मिक स्थलों की पदयात्रा की।
अब नर्मदा जल लेकर महाकाल की ओर कदम
21 साल की इस आस्था यात्रा में अब सतीश ने एक और संकल्प लिया है। वे जबलपुर के गौरीघाट से नर्मदा जल लेकर उज्जैन स्थित बाबा महाकाल के दरबार तक पदयात्रा करेंगे। उज्जैन पहुंचकर वे पवित्र नर्मदा जल से बाबा महाकाल का अभिषेक करेंगे।
सतीश के लिए यह यात्रा केवल एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचने का माध्यम नहीं है, बल्कि मां के प्रति श्रद्धा, भगवान के प्रति समर्पण और अपने संकल्प को पूरा करने की साधना है। वे कहते हैं कि 21 साल पहले मिली उस आध्यात्मिक प्रेरणा ने उनके जीवन की दिशा बदल दी। तब से कदम लगातार धार्मिक यात्राओं की राह पर बढ़ रहे हैं।
पैरों में छाले हों या रास्ता कठिन हो, सतीश का संकल्प नहीं रुकता। उनका कहना है कि जब मंजिल भगवान के चरण हों तो रास्ते की कठिनाइयां भी आस्था का हिस्सा बन जाती हैं।


