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महा-खुलासा: नर्मदापुरम जिला अस्पताल में 'अधिकारियों की मौज', जनता के टैक्स और सरकारी खजाने पर डाका!

 

ड्यूटी के समय सो रहे जिम्मेदार, मोबाइल गेमिंग में मग्न; वायरल वीडियो और तस्वीरों ने खोली शासकीय सिस्टम की पोल


नर्मदापुरम 3/10/2026  (पत्रकार देवेंद्र सिंह यादव) नर्मदापुरम मध्य प्रदेश शासन के लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग तथा सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग के कड़े निर्देशों को ठेंगा दिखाते हुए नर्मदापुरम का मुख्य जिला अस्पताल इस समय घोर प्रशासनिक अराजकता और निष्प्रयोज्यता का केंद्र बना हुआ है। एक तरफ दूर-दराज के ग्रामीण इलाकों से आए असहाय, गरीब और गंभीर मरीज इलाज और पुनर्वास सुविधाओं के लिए भटक रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ अस्पताल के पुनर्वास/प्रशासनिक प्रभाग में तैनात जिम्मेदार अधिकारी अपने नैतिक, कानूनी और शासकीय कर्तव्यों को ताक पर रखकर कुंभकर्णी नींद सो रहे हैं।

कुर्सी पर पसारे पैर, टेबल पर नींद; क्या इसी काम का मिलता है लाखों का वेतन?

हाल ही में सोशल मीडिया, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया और प्रिंट मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर वायरल हुए प्रामाणिक वीडियो और छायाचित्रों (Photos) ने जिला अस्पताल की कार्यप्रणाली को बेनकाब कर दिया है। वायरल सामग्री में विभाग से जुड़े प्रशासनिक अधिकारी (संजीव गौर) शासकीय कार्यालयीन समय (Duty Hours) के दौरान टेबल पर पैर फैलाकर आराम फरमाते और मोबाइल में व्यस्त दिखाई दे रहे हैं। अन्य तस्वीरों में वे अपनी शासकीय कुर्सी पर गहरी नींद में लीन नज़र आ रहे हैं।

उल्लेखनीय है कि जिला अस्पताल में तैनात नियमित व संविदा अधिकारियों का वेतन मध्य प्रदेश शासन के राज्य कोष (IFMIS पोर्टल) के माध्यम से जन-साधारण द्वारा चुकाए गए टैक्स से आता है। चिकित्सक व प्रशासनिक पदों पर तैनात कर्मचारियों को प्रतिमाह ₹67,000 से लेकर ₹1,50,000+ तक का भारी-भरकम वेतन, महंगाई भत्ता (DA), मकान किराया भत्ता (HRA) और नॉन-प्रैक्टिसिंग अलाउंस (NPA) सिर्फ इसलिए दिया जाता है ताकि वे 24x7 और तय समय-सारणी के अनुसार जनता को स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करा सकें। लेकिन नर्मदापुरम जिला अस्पताल में जनता की गाढ़ी कमाई के पैसों की इस तरह सरेआम बर्बादी की जा रही है।

विधिक नियमों और शासकीय आदेशों की सरेआम अवहेलना

मध्य प्रदेश सिविल सेवा आचरण नियम (MP Civil Services Conduct Rules) तथा MP Civil Services (Classification, Control & Appeal) Rules के स्पष्ट प्रावधान हैं कि शासकीय समय में अपने कर्तव्यों से अनुपस्थित रहना, कार्यस्थल पर निष्क्रियता दिखाना और पदीय दायित्वों का निर्वहन न करना गंभीर कदाचरण (Gross Misconduct) की श्रेणी में आता है। इसके अतिरिक्त, बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली और शासकीय समय का पालन अनिवार्य होने के बावजूद, अधिकारियों की यह गैर-जिम्मेदाराना हरकत शासकीय नियमों की खुली अवमानना है।

पत्रकार देवेंद्र सिंह यादव द्वारा दिव्यांग प्रमाण पत्र जांच की मांग; अब तक जांच प्रतिवेदन गायब!

अस्पताल में चल रही इस मनमानी का दायरा केवल ड्यूटी से नदारद रहने तक ही सीमित नहीं है। मामले में गंभीर मोड़ तब आया जब पत्रकार देवेंद्र सिंह यादव द्वारा अस्पताल से जारी किए गए दिव्यांग प्रमाण पत्रों (Disability Certificates) में संभावित गड़बड़ियों और फर्जीवाड़े की आशंका व्यक्त करते हुए विधिवत जांच की मांग की गई थी।

अत्यंत खेदजनक और संदेहास्पद पहलू यह है कि पत्रकार देवेंद्र सिंह यादव द्वारा उठाई गई इस जायज़ मांग और आवेदन के बाद भी आज दिनांक तक संबंधित अधिकारियों द्वारा जांच प्रतिवेदन (Investigation Report) उपलब्ध नहीं कराया गया है। जांच रिपोर्ट को सार्वजनिक न करना और इसे दबाकर बैठना इस बात का प्रबल संकेत देता है कि अस्पताल प्रशासन दाल में कुछ काला छुपाने का प्रयास कर रहा है।

प्रशासनिक मौन पर उठते गंभीर सवाल: आखिर किसे बचा रहे हैं आला अधिकारी?

अखबारों, न्यूज़ चैनलों, फेसबुक, इंस्टाग्राम और अन्य जनसंचार माध्यमों पर इस घोर लापरवाही की खबरें लगातार प्रसारित होने के बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों का मौन धारण कर लेना अत्यंत चिंताजनक है:

मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) एवं सिविल सर्जन की ओर से अब तक कोई दंडात्मक अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं की गई।

जिला कलेक्टर महोदय एवं संभागीय आयुक्त के स्तर से भी इस पर कोई कड़ा संज्ञान या निलंबन का आदेश जारी नहीं हुआ।

जनसंपर्क विभाग (DPR) द्वारा भी इस व्यापक जनहित के मुद्दे पर शासकीय रुख स्पष्ट नहीं किया गया।

क्या जिला प्रशासन का यह मौन इन लापरवाह और भ्रष्ट आचरण करने वाले अधिकारियों को प्रत्यक्ष संरक्षण दे रहा है?

अंतिम चेतावनी: अब निष्पक्ष कार्रवाई का समय है

स्वास्थ्य सेवा कोई केवल 8 से 2 बजे की नौकरी नहीं, बल्कि सीधे-सीधे मानव जीवन से जुड़ी एक पवित्र जनसेवा है। यदि इस प्रकार के अधिकारियों पर तत्काल प्रभाव से 'मध्य प्रदेश सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम 1966' के तहत कठोर अनुशासनात्मक एवं दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाती, और पत्रकार देवेंद्र सिंह यादव द्वारा मांगी गई दिव्यांग प्रमाण पत्र जांच रिपोर्ट को शीघ्र सार्वजनिक नहीं किया जाता, तो यह माना जाएगा कि संपूर्ण प्रशासनिक तंत्र इस निष्क्रियता का हिस्सेदार है।

जनता और निष्पक्ष पत्रकारिता अब कागज़ी आश्वासनों से संतुष्ट नहीं होगी; अब सीधी और ठोस कार्रवाई की आवश्यकता है। पत्रकार देवेंद्र सिंह यादव +7869095514







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