तालाब किनारे मिला तेंदुआ शावक का शव, मौत ने वन विभाग की निगरानी व्यवस्था पर उठाए सवाल
छगन कुशवाहा
पिपरिया/मटकुली। सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के मटकुली गेम रेंज अंतर्गत झिरिया क्षेत्र में तालाब के पास मादा तेंदुआ शावक का शव मिलने से वन विभाग की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं। शावक की मौत संदिग्ध परिस्थितियों में हुई है। प्रारंभिक तौर पर वन विभाग द्वारा इसे वाहन की चपेट में आने से हुई सामान्य सड़क दुर्घटना बताया जा रहा है। हालांकि, घटनास्थल और शव बरामदगी से जुड़े परिस्थितिजन्य पहलुओं को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं।
शावक का शव जिस क्षेत्र में मिला, वहां वन्यजीवों की आवाजाही रहती है। ऐसे में रिजर्व फॉरेस्ट क्षेत्र में वन्यजीवों की निगरानी और गश्त व्यवस्था कितनी प्रभावी है, यह सवाल अब सामने आया है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि क्षेत्र में वन्यजीवों की नियमित आवाजाही है तो संवेदनशील स्थानों पर निगरानी और पेट्रोलिंग को और मजबूत किया जाना चाहिए।
शव मिलने के बाद सामने आई निगरानी व्यवस्था की कमी
शावक की मौत के बाद वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और शव बरामद किया। लेकिन घटना के बाद यह सवाल भी उठ रहा है कि वन क्षेत्र में लगातार निगरानी के बावजूद शावक की मौजूदगी और उसकी गतिविधियों पर समय रहते नजर क्यों नहीं पड़ी। यदि वाहन की टक्कर से मौत हुई है तो घटना किस स्थान पर और किस परिस्थिति में हुई, इसका स्पष्ट पता लगाना भी जरूरी है।
ग्रामीण क्षेत्र के आसपास वन्यजीवों की मौजूदगी को देखते हुए लोगों में भी चिंता है। उनका कहना है कि वन विभाग को केवल घटना के बाद कार्रवाई करने के बजाय संवेदनशील क्षेत्रों में नियमित गश्त और निगरानी पर विशेष ध्यान देना चाहिए।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट से साफ होगी मौत की वजह
शावक की मौत का वास्तविक कारण पोस्टमार्टम और विभागीय जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। फिलहाल वाहन की चपेट में आने की आशंका जताई जा रही है। ऐसे में जांच में यह भी स्पष्ट होना जरूरी है कि हादसा वास्तव में सड़क दुर्घटना थी या इसके पीछे कोई अन्य वजह रही।
तेंदुआ शावक की मौत ने सतपुड़ा टाइगर रिजर्व की सुरक्षा व्यवस्था, वन्यजीव निगरानी और रिजर्व फॉरेस्ट की गश्त व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना होगा कि वन विभाग जांच में मौत की वास्तविक वजह और घटना से जुड़े सभी पहलुओं को कितनी गंभीरता से सामने लाता है।



