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400 साल पुरानी खेडापति माता मठ में आज भी कायम है आस्था, पूर्वजों की परंपरा को निभा रहा पुरोहित परिवार

 

400 साल पुरानी खेडापति माता मठ में आज भी कायम है आस्था, पूर्वजों की परंपरा को निभा रहा पुरोहित परिवार


पुराना खेडापति मातामठ देखें पूरा विडिओ 


इमली, पीपल, बरगद और नीम के प्राचीन वृक्षों से आच्छादित है मठ परिसर, हर वर्ष होता है नगर भंडारा



छगन कुशवाहा 

पिपरिया। शहर की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत में खेडापति माता मठ का विशेष स्थान है। नदी पार गांधी वार्ड स्थित यह प्राचीन मठ करीब 400 वर्षों से श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बना हुआ है। यहां विराजमान खेडापति माता के प्रति लोगों की गहरी श्रद्धा है। मान्यता है कि माता नगर की रक्षा करती हैं और अपने भक्तों पर कृपा बनाए रखती हैं। पीढ़ी दर पीढ़ी चली आ रही पूजा-अर्चना की परंपरा आज भी पूरी श्रद्धा के साथ निभाई जा रही है।




प्राचीन वृक्षों की छांव में विराजमान हैं माता


खेडापति माता मठ की पहचान यहां मौजूद विशाल और प्राचीन वृक्ष भी हैं। मठ परिसर में दो विशाल इमली के वृक्ष हैं, जो पूरे प्रांगण को छायादार बनाते हैं। इसके अलावा पीपल, बरगद और नीम के वृक्ष भी इस स्थान की प्राकृतिक सुंदरता और प्राचीनता को दर्शाते हैं। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, यहां के कुछ वृक्ष कई पीढ़ियों के इतिहास के साक्षी रहे हैं। मंदिर परिसर में समय-समय पर निर्माण और विकास कार्य होते रहे हैं, लेकिन इसकी प्राचीन धार्मिक पहचान आज भी बनी हुई है।


प्राचीन मठ से शहर के बीचोंबीच मंदिर तक जुड़ी आस्था




स्थानीय परंपरा के अनुसार, खेडापति माता मठ से जुड़े कुछ पत्थर के प्रतीकात्मक चिह्न और प्रतिमाएं पूर्वजों द्वारा देवगांव से पिपरिया की पुरानी बस्ती में लाए गए थे। समय के साथ शहर के मध्य में खेडापति माता का भव्य मंदिर स्थापित हुआ। आज भी शुभ कार्यों के अवसर पर श्रद्धालु माता को निमंत्रण देने और पूजा-अर्चना करने पहुंचते हैं। भक्तों की मान्यता है कि खेडापति माता नगर की रक्षक हैं और शहर को विपत्तियों से बचाती हैं।


पुरानी बस्ती खेडापति माता मठ देखें पूरा विडियो


गांव की रक्षा करने वाली ग्राम देवी के रूप में मान्यता


भारतीय लोक परंपरा में ग्राम देवताओं का विशेष महत्व रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में खेड़ापति को गांव की सीमा और उसकी रक्षा से जोड़कर देखा जाता है। 'खेड़ा' का संबंध गांव या ग्राम सीमा से तथा 'पति' का अर्थ स्वामी या रक्षक से जोड़ा जाता है। इसी मान्यता के चलते कई स्थानों पर खेड़ापति माता की पूजा ग्राम और क्षेत्र की सुख-समृद्धि, शांति तथा सुरक्षा की कामना के साथ की जाती है। पिपरिया का खेडापति माता मठ भी इसी लोक आस्था और धार्मिक परंपरा का महत्वपूर्ण केंद्र है।


पूर्वजों की सेवा परंपरा आज भी जारी


खेडापति माता मठ के पुजारी पंडित सुनीत पुरोहित ने बताया कि माता की सेवा और पूजा-अर्चना उनके पूर्वजों के समय से चली आ रही है। परिवार आज भी इस परंपरा को पूरी निष्ठा और श्रद्धा के साथ आगे बढ़ा रहा है। उन्होंने बताया कि हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी पुरोहित परिवार की ओर से नगर भंडारे का आयोजन किया गया , जिसमें श्रद्धालु प्रसादी ग्रहण की ।


खेडापति माता मठ केवल पूजा-अर्चना का स्थान नहीं, बल्कि पिपरिया की प्राचीन धार्मिक विरासत, पारिवारिक परंपरा और लोक आस्था का प्रतीक भी है। विशाल वृक्षों की शीतल छाया, वर्षों पुरानी मान्यताएं और सेवा की निरंतर परंपरा इस स्थान को विशेष बनाती हैं। बदलते समय के साथ शहर का स्वरूप भले ही बदल रहा हो, लेकिन खेडापति माता के प्रति श्रद्धालुओं की आस्था आज भी उसी श्रद्धा और विश्वास के साथ कायम है।





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