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पिपरिया-करेली मार्ग पर जगह-जगह बड़े गड्ढे, सड़क किनारे झाड़ियों का कब्जा; दो दिन से बीच सड़क पर पड़ा बबूल का पेड़, राहगीरों ने खुद हटाया

 

सड़क पर गड्ढे, किनारों पर झाड़ियां और बीच रास्ते में पेड़, आखिर किसके भरोसे हैं राहगीर ?

टोल चुकाने के बाद भी जोखिम भरा सफर, पिपरिया-करेली मार्ग की बदहाली पर जिम्मेदार मौन



पिपरिया-करेली मार्ग पर जगह-जगह बड़े गड्ढे, सड़क किनारे झाड़ियों का कब्जा; दो दिन से बीच सड़क पर पड़ा बबूल का पेड़, राहगीरों ने खुद हटाया 


छगन कुशवाहा 

पिपरिया। पिपरिया-करेली मार्ग पर वाहन चालकों से टोल वसूली तो लगातार की जा रही है, लेकिन सड़क के रखरखाव और यात्रियों की सुरक्षा को लेकर जिम्मेदारों की उदासीनता साफ नजर आ रही है। मार्ग के कई हिस्सों में सड़क जर्जर हो चुकी है। जगह-जगह बड़े-बड़े गड्ढे वाहन चालकों के लिए परेशानी और दुर्घटनाओं का कारण बन रहे हैं। वहीं सड़क के किनारों और डिवाइडर पर उगी झाड़ियां तथा पेड़ों की टहनियां सड़क तक फैल गई हैं, जिससे मार्ग लगातार संकरा होता जा रहा है।



लापरवाही का आलम यह है कि टोल नाके से कुछ ही दूरी पर पिछले दो दिनों से बबूल का एक पेड़ बीच सड़क पर पड़ा हुआ था। इस दौरान टोल प्रबंधन और संबंधित जिम्मेदारों की ओर से उसे हटाने की पहल नहीं की गई। आखिरकार वहां से गुजरने वाले राहगीरों ने अपनी सूझबूझ दिखाते हुए अपने स्तर पर जितना संभव हो सका, पेड़ को सड़क से किनारे सरकाया। इसके बावजूद सड़क पर अचानक पेड़ दिखाई देना वाहन चालकों के लिए दुर्घटना का बड़ा खतरा बना हुआ है।



कागजों में मेंटेनेंस, सड़कों पर बदहाली


टोल मार्ग पर नियमित रखरखाव के तहत गड्ढों की मरम्मत, पैचवर्क, सड़क की समय-समय पर नई परत बिछाना, रोड मार्किंग, संकेतक बोर्ड, रिफ्लेक्टर, नालियों की सफाई और सड़क किनारे उगी झाड़ियों की कटाई जैसे कार्य किए जाने चाहिए। इसके अलावा यात्रियों की सुरक्षा और आपातकालीन सहायता की व्यवस्था भी टोल प्रबंधन की जिम्मेदारी में शामिल होती है। लेकिन पिपरिया-करेली मार्ग की मौजूदा स्थिति इन व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े कर रही है।


टोल वसूली में तत्परता, सुविधाओं में क्यों सुस्ती?


सड़क पर सफर करने वाले वाहन चालक टोल शुल्क इस उम्मीद से चुकाते हैं कि उन्हें सुरक्षित और बेहतर सड़क मिलेगी। लेकिन जब सड़क पर गड्ढे हों, झाड़ियां रास्ते तक फैल रही हों और बीच सड़क पर पड़े पेड़ को हटाने के लिए भी राहगीरों को आगे आना पड़े, तो टोल प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठना स्वाभाविक है।






अब सवाल यह है कि पिपरिया-करेली मार्ग का नियमित निरीक्षण कौन कर रहा है? सड़क पर पड़े पेड़ को हटाने में दो दिन क्यों लग गए और सड़क के गड्ढों व झाड़ियों की सफाई के लिए जिम्मेदार एजेंसी कब कार्रवाई करेगी? संबंधित विभाग और टोल प्रबंधन को तत्काल संज्ञान लेकर मार्ग की मरम्मत, झाड़ियों की कटाई और सुरक्षा व्यवस्थाएं दुरुस्त करनी चाहिए, ताकि टोल चुकाने वाले यात्रियों को कम से कम सुरक्षित सफर तो मिल सके।





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