नर्मदा की प्रथम अधोमुखी
परिक्रमा का संकल्प, 3800
किमी की यात्रा पर निकलेंगे
नागा साधु धर्मपुरी महाराज
छगन कुशवाहा
पिपरिया। मां नर्मदा की महिमा, पवित्रता और आध्यात्मिक महत्व को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से श्री निरंजनी अखाड़ा के नागा साधु दिगंबर श्री धर्मपुरी जी महाराज ने मां नर्मदा की प्रथम अधोमुखी एवं निरंतर परिक्रमा का संकल्प लिया है। जनकल्याण, विश्व शांति और मां नर्मदा की शांति एवं महत्ता के संदेश को समाज तक पहुंचाना इस यात्रा का प्रमुख उद्देश्य बताया गया है।
संकल्प के तहत महाराज अमरकंटक स्थित मां नर्मदा के उद्गम स्थल से दक्षिण तट की ओर से लगभग 3800 किलोमीटर की यात्रा करेंगे। यात्रा निरंतर हाथ के वल चलकर पूरी करने का संकल्प लिया गया है। धार्मिक दृष्टि से इसे नर्मदा भक्ति और साधना से जुड़ी विशेष यात्रा माना जा रहा है।
यात्रा के दौरान मां नर्मदा के प्रति आस्था, श्रद्धा और संरक्षण का संदेश भी लोगों तक पहुंचाया जाएगा। नर्मदा को भारतीय संस्कृति में भगवान शिव की प्रिय और मोक्षदायिनी नदी के रूप में विशेष स्थान प्राप्त है। इसी भावना को व्यक्त करते हुए यात्रा में नर्मदा स्तुति और शिव आराधना के मंत्रों का स्मरण किया जाएगा।
‘सुमिरि महेसहि कइहें निहोरी,
बिनती सुनहु सदाशिव मोरी।
शिवप्रिय मेकल सैल सुता सी,
सकल सिद्धि सुख संपति रासीं।’
मां नर्मदा की यह परिक्रमा केवल धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि जनकल्याण, विश्व शांति और नर्मदा की महत्ता को जन-जन तक पहुंचाने का आध्यात्मिक संकल्प है। यात्रा के माध्यम से श्रद्धालुओं को नर्मदा के प्रति आस्था के साथ ही नदी और पर्यावरण संरक्षण के लिए भी प्रेरित किया जाएगा।


